Satya Darshan

2 जनवरी: इतिहास मे आज क्या है खास

अद्भुत कलाकार, शानदार इंसान और समाज के दंभ पर हल्ला बोलने की ताकत रखने वाले हाशमी को उनसे द्वेष रखने वाले विरोधी तत्वों ने 1989 के नए साल के मौके पर बड़ी बेरहमी से पीटा।

एक जनवरी को दिल्ली के पास हुई घटना में हाशमी को इतनी चोट आई कि उनका शरीर बर्दाश्त नहीं कर पाया और अगले दिन यानी दो जनवरी, 1989 को उन्होंने दम तोड़ दिया पर हाशमी की सोच आज भी जिंदा है।

दिल्ली में ही पैदा हुए हाशमी तब सिर्फ 34 साल के थे। बला के क्रांतिकारी और हिन्दू मुस्लिम एकता की मिसाल थे। समाज में घुले अपराधों और भ्रष्टाचार के खिलाफ जिस तरह उनकी आवाज गूंजती, वैसे ही जन नाट्य मंच के थियेटर शो भी। उन्होंने 19 साल में यह ग्रुप बना डाला और 1976 में सीपीएम में शामिल हो गए।

दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज से इंग्लिश में एमए करने के बाद हाशमी ने कहीं पैसे वाली नौकरी करने से ज्यादा समाज की बुराइयों पर तंज करने का फैसला किया। थियेटर के अलावा उन्होंने कविताएं भी लिखीं और स्केच भी बनाए।

वह अपने नाटकों में उसी आम आदमी का जिक्र करते थे, जिनका नाम अब आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल लिया करते हैं। आम आदमी के दर्द को हाशमी के थियेटरों में जिस बेचैनी से उठाया जाता, लोग मंत्रमुग्ध हो जाते। 

सफेद टोपी लगाए, बगल में रूल दबाए सफदर हाशमी की एक तस्वीर आज भी जेहन में कौंधती रहती है। यह उनका करिश्माई अंदाज ही था कि न सिर्फ उनके नाटकों को चाहने वाले, बल्कि उनसे एक बार भी मुलाकात करने वालों के लिए सफदर दिल में बस जाते।

औरत, गांव से शहर तक, राजा का बाजा होते हुए जब उनके थियेटर का सफर नुक्कड़ नाटक हल्ला बोल पर पहुंचा, तो सफदर ने इसे गाजियाबाद नगर निगम चुनाव के वक्त प्रस्तुत करने का फैसला किया।

1 जनवरी, 1989 को वह इसे साहिबाबाद के झंडापुर गांव में जब पेश कर रहे थे, तभी एक राजनीतिक दल के समर्थकों ने उन पर हमला बोल दिया। नुक्कड़ नाटक अधूरा छूट गया। सफदर बुरी तरह घायल हुए और अगले दिन दो जनवरी, 1989 को उन्होंने दम तोड़ दिया।

सफदर की पत्नी मालाश्री हाशमी ने उनकी मौत के दो दिन बाद चार जनवरी को फिर झंडापुर गांव का रुख किया और तीन दिन पहले के अधूरे नुक्कड़ नाटक को पूरा किया।

2 जनवरी की अन्य महत्त्वपूर्ण घटनाएँ – 

* ब्रिटिश सैनिकों ने भारत के कलकत्ता शहर (अब कोलकाता) पर 1757 में कब्जा किया।

* फ्रांसिसी फोटोग्राफर लुई दागुएरे ने 1839 में चांद की पहली फोटो प्रदर्शित की।

* रामकृष्ण के आदेश के बाद 1899 में साधु कलकत्ता (अब कोलकाता) स्थित बेलूर मठ में रहने लगे।

* द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1942 में जापानी सेना ने फिलीपींस की राजधानी मनीला पर कब्जा किया।

* पद्म विभूषण पुरस्कार की स्थापना 2 जनवरी 1954 में की गयी थी।

* भारत रत्‍न पुरस्कार 2 जनवरी 1954 को प्रारम्भ किया गया था।

* जनरल मानिक शॉ को 1973 में फ़ील्ड मार्शल बनाया गया।

* रणसिंधे प्रेमदास 1989 में श्रीलंका के राष्ट्रपति बने।

* तिरुअनंतपुरम हवाई अड्डा को 1991 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाया गया।

2 जनवरी को जन्मे व्यक्ति – 

* केरल के प्रसिद्ध समाज सुधारक मन्नत्तु पद्मनाभन का जन्म 1878 में हुआ।

* हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार और उपन्यासकार जैनेन्द्र कुमार का जन्म 1905 में हुआ।

* प्रसिद्ध भारतीय उद्यमी थे, जिनका भारत के दुग्ध उद्योग में योगदान डी. एन. खुरोदे का जन्म 1906 में हुआ।

* भारतीय अमरीकी गणितज्ञ एस. आर. श्रीनिवास वर्द्धन का जन्म 1940 में हुआ।

* प्रसिद्ध तैराक बुला चौधरी का जन्म 1970 में हुआ।

2 जनवरी को हुए निधन –

* प्रसिद्ध महिला स्वतंत्रता सेनानी तथा समाज सुधारक डॉ. राधाबाई की 2 जनवरी 1950 को मृत्यु।

* ‘भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस’ के प्रमुख नेता तथा आधुनिक उड़ीसा के निर्माताओं में से एक हरे कृष्ण मेहताब की 2 जनवरी 1987 को मृत्यु।

* प्रसिद्ध मार्क्सवादी नाटककार, कलाकार, निर्देशक एवं गीतकार सफ़दर हाशमी की 2 जनवरी 1989 को मृत्यु।

* गुजराती साहित्यकार राजेन्द्र शाह की 2 जनवरी 2010 को मृत्यु।

* प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व लोकसभा अध्यक्ष बलिराम भगत की 2 जनवरी 2011 को मृत्यु।

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