Satya Darshan

बाजपेयी के बाद अब मोदी सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री का सिलसिला निर्बाध जारी

नयी दिल्ली (एसडी) | अप्रैल 22, 2019

अबतक एयर इंडिया, पवन हंस, बीईएमएल, स्कूटर्स इंडिया समेत 35 कंपनियां लिस्ट में हुईं दर्ज।

वाजपेयी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचने के लिए अलग से डिसइन्वेस्टमेंट डिपार्टमेंट बनाया जिसके अंतर्गत  भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (BALCO), हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, मारुति उद्योग लिमिटेड, मॉर्डन फूड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, एचडीएल लिमिटेड, सीएमसी लिमिटेड,  इंडिया पेट्रोकेमिकल्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड, विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL) होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के अंतर्गत 2 होटल यूनिट्स और इंडियन टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ITDC) के 17 होटल प्राइवेट कंपनियों को बेचे गए थे।

उस दौरान एनडीए सरकार के निजीकरण के फैसले के खिलाफ उनके ही सहयोगी दलों ने विपक्ष की भूमिका निभाई थी और बाजपेयी सरकार को 2004 के चुनावो में करारी शिकस्त मिली थी।

भाजपा सरकारों की खासियत सरकारी उपक्रमों की बिक्री का क्रम जारी रखते हुए एक बार फिर, मोदी सरकार ने भी दर्जनों सरकारी उपक्रमों को बेचने की तैयारी मुक्ममल कर ली है।

वित्त मंत्रालय ने केन्द्रीय लोक उपक्रमों (सीपीएसई) से ऐसी सम्पत्तियों की सूची जल्द से जल्द तैयार करने को कहा है जिन्हें बेचा जा सकता है।

साथ ही उन्हें इसके लिए संभावित निवेशकों तथा बोलीदाताओं से बात शुरू करने को भी कहा गया है। इसका मकसद लोक उपक्रमों की गैर-प्रमुख आस्तियों का शीघ्रता से बाजार में चढ़ाना है।

एक अधिकारी ने कहा कि ऐसे सीपीएसई के पास विशेष उद्देशीय कोष (एसपीवी) के लिए गैर-प्रमुख आस्तियों को सुपुर्द कर देने अथवा गैर-प्रमुख आस्तियों की बिक्री से प्राप्त होने वाले लाभ को एक एस्क्रो खाते में स्थानांतरित करने का विकल्प होगा।

फरवरी में मंत्रिमंडल के एक फैसले के बाद निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) ने इस हफ्ते की शुरुआत में सीपीएसई की गैर-मुख्य आस्तियों के मौद्रीकरण और शत्रु संपत्तियों के मौद्रीकरण के लिए दिशा-निर्देश दिए थे।

दिशानिर्देशों के अनुसार, वित्तमंत्री की अगुवाई वाले मंत्रियों की समिति द्वारा शिनाख्त की गई गैर-मुख्य आस्तियों का मौद्रीकरण करने के लिए 12 महीनों का समय होगा। जिसमें विफल रहने पर वित्त मंत्रालय सीपीएसई को बजटीय आवंटन रोक सकता है।

सीपीएसई की गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों की बिक्री के माध्यम से प्राप्त राशि विनिवेश आय का हिस्सा बनेगी।

सरकार ने पहले से ही रणनीतिक बिक्री के लिए लगभग सार्वजनिक क्षेत्र की 35 कंपनियों की पहचान की है। इनमें एयर इंडिया, पवन हंस, बीईएमएल, स्कूटर्स इंडिया, भारत पंप कंप्रेशर्स, और प्रमुख इस्पात कंपनी- ‘सेल’ की भद्रावती, सलेम और दुर्गापुर इकाइयां शामिल हैं।

जिन अन्य सीपीएसई के एकमुश्त बिक्री के लिए मंजूरी दी गई है, उसमें हिंदुस्तान फ्लोरोकार्बन, हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट, एचएलएल लाइफ केयर, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्रिज एंड रूफ इंडिया, एनएमडीसी का नागरनार इस्पात संयंत्र और सीमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और आईटीडीसी की इकाइयां शामिल हैं।

 

 

 

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