Satya Darshan

राष्ट्रवाद और अंधराष्ट्रवाद

संपादकीय | अप्रैल 22, 2019

आसान शब्दों में राष्ट्र के प्रति निष्ठां, उसकी प्रगति और उसके प्रति सभी नियम व आदर्शो को बनाये रखने का सिद्धांत ही राष्ट्रवाद कहलाता है !

जब पॉलिटिक्स राष्ट्र के एकीकरण के लिए हो राष्ट्र के निर्माण के लिए हो तो उसका स्वागत करना चाहिए ! लेकिन जब वही पॉलिटिक्स सत्ता पाने के मोह में एकीकरण की बजाये विघटनकारी राजनीती का उपयोग करे राष्ट्र निर्माण के बजाये ! राष्ट्र में रहने वाले लोगो के बिच मन-भेद उत्पन्न करे, तो ऐसी राजनीती और ऐसी राजनीति करने वाले लोगो को सत्ता से बाहर कर देना चाहिए !

राष्ट्रवाद का मतलब यह नहीं है की जो गलत हो रहा है उसे बर्दास्त किया जाये ! उसे सही मानने की भूल केवल एक मुर्ख ही कर सकता है ! अगर राष्ट्रवाद नियंत्रण में हो तो वो राष्ट्र और उसके लोगो का निर्माण करता है ! लेकिन वही राष्ट्रवाद जब अंधराष्ट्रवाद में परिवर्तित हो जाये तो यह राष्ट्र और उसके लोगो के विनाश का कारण बनता है !

अब ये आप पर निर्भर है की आप राष्ट्रवाद को अपने भीतर जगह दे कर प्रश्न करें उनसे जिन्हे आप ने राष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी है ! या फिर अंधराष्ट्रवाद में सब कुछ बर्दास्त कीजिये और हुक्मरानों के हर गलत फैसले पर अपनी सहमति की मोहर लगाते रहिये !

लेकिन इतना याद रखियेगा की जब आपके बच्चे आपसे पूँछे की जब मुल्क अंधराष्ट्रवाद में तबाह और बरबाद हो रहा था तो उस वक़्त आप क्या कर रहे थे ? ऐसे ही बेहिसाब सवालों के जवाब पहले से ढूंढ कर रखिये ताकि आपको अपने ही बच्चों के सामने शर्मिंदा ना होना पड़े !

हम में से कितने ऐसे लोग है जो राष्ट्रवाद और अंधराष्ट्रवाद का फर्क समझते होंगे ! अपने देश के प्रति वफादार रहना तो राष्ट्रवाद है लेकिन क्या किसी व्यक्ति और विशेष का समर्थक होना जरुरी है हमारे राष्ट्रवाद के लिए !

क्या हमारा राष्ट्रवाद इस बात से तय होगा की हम किस पार्टी को सपोर्ट करते है और किसे नहीं ! क्या कोई व्यक्ति हमारे राष्ट्रवाद का हमे खुद सर्टिफिकेट दे सकता है !

क्या हमे अपने राष्ट्रवाद के लिए किसी समुदाय संस्था संस्कृति सभ्यता भाषा वेश भूषा बोली खान पान सभी चीजों में सामान होना होगा या फिर विविधताओं में भी राष्ट्रवाद के बीज बोये जा सकते है !

मैं किसी एक मुल्क की बात नहीं कर रहा आप अपने अपने मुल्क में देखिये ! राष्ट्रवाद के नाम पर क्या हो रहा है कही कोई सेना के द्वारा की गयी प्रत्येक कार्यवाही को सही ठहरा रहा है तो कही कोई उसी सेना की उसी कार्यवाही को गलत और बेबुनियाद बोल रहा है !

कही कोई अपनी ही सरकार के विरुद्ध जंग लड़ रहा है तो कही कोई किसी प्रदर्शन को कुचलने में तुला है ! इस तरह की सभी घटनाओं को क्या आप राष्ट्रवाद से जोड़ सकते है ! या फिर आप ऐसे लोगो को देशद्रोही के रूप में देखते है !

जाहिर है कुछ को जोड़ा जा सकता है जबकि बहुतों को नहीं ! क्या हम सेना की किसी भी कार्यवाही पर सवाल नहीं कर सकते सिर्फ इस लिए क्योकि वह हमारी और सिमा की सुरक्षा करती है ! जबकि सेना भी खुद किसी भी लोकतान्त्रिक व्यवस्था में की गयी केवल एक संघटनात्मक व्यवस्था ही तो है !

आपका राष्ट्रवाद सही मायनो में राष्ट्रवाद है या फिर अंधराष्ट्रवाद यह जानने के लिए आपको खुद से सवाल करने चाहिए की जिस विचारधारा को आप अपना राष्ट्रवाद मानते है जिस कर्म को करने में आप उसमे राष्ट्रवाद देखते है तो क्या वह विचार वह कर्म जो आप कर रहे है ! क्या वह सभी के अच्छे के लिए है या फिर सिर्फ आपके और आपके लोगो के लिए या फिर सिर्फ किसी खास धर्म जाती संस्कृति को मानने वाले लोगो के लिए है !

अगर आपका राष्ट्रवाद सभी के भलाई के लिए है अगर आपका राष्ट्रवाद नफरत नहीं फैलाता अगर आपके राष्ट्रवाद से किसी बेकसूर की जान नहीं जाती तो आप यह कह सकते है की आपका राष्ट्रवाद सही दिशा में है ! इसे सही दिशा में बनाये रखने के लिए अपनी बीते हुए कल और आज को ध्यान से देखना और उसे समझना भी जरुरी है!

हम सब में मत-भेद हो सकते है और यह सही भी है, मगर इस बात का ख्याल रहे की यह मत-भेद मन–भेद ना बन पाए !

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