Satya Darshan

20 वर्षों की बेदाग सेवा को दागदार करने की साजिश, अगले हफ्ते है बेहद अहम केस : CJI

पंकज जैन | अप्रैल 21, 2019

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के खिलाफ एक महिला द्वारा लगाए गए यौन उत्पीडऩ के आरोपों पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में विशेष सुनवाई हुई। सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा कि चीफ जस्टिस के खिलाफ आरोपों पर एक उचित बेंच (अन्य जजों की बेंच) सुनवाई करेगी। 

कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बेहद गंभीर खतरे में है। इस दौरान सीजेआई ने आरोपों को निराधार बताते हुए इसे अगले सप्ताह कुछ अहम मामलों की होने वाली सुनवाई से उन्हें रोकने की कोशिश करार दिया।

सीजेआई ने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने एक महिला द्वारा लगाए गए अपुष्ट आरोपों को प्रकाशित किया। महिला की आपराधिक पृष्ठभूमि है और वह अपने क्रिमिनल रिकॉर्ड के कारण 4 दिनों तक जेल में रह चुकी है। सीजेआई ने कहा कि पुलिस भी महिला के व्यवहार को लेकर चेतावनी दे चुकी है।

मीडिया न दे अपुष्ट खबरें - पीठ

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना ने मीडिया से कहा कि वह जिम्मेदारी और सूझबूझ के साथ काम करे और सत्यता की पुष्टि किए बिना महिला की शिकायत को प्रकाशित न करे। हम कोई न्यायिक आदेश पारित नहीं कर रहे हैं। लेकिन, यह मीडिया पर छोड़ रहे हैं कि वह न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदारी से काम करे। 

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि न्यायिक प्रणाली में लोगों के विश्वास को देखते हुए हम सभी न्यायपालिका की स्वंतत्रता को लेकर बहुत चिंतित हैं। इस तरह के अनैतिक आरोपों से न्यायपालिका पर से लोगों का विश्वास डगमगाएगा।

20 वर्षों की सेवा में नहीं लगा कोई दाग

सीजेआई गोगोई ने कहा कि यह अविश्वसनीय है। मुझे नहीं लगता कि इन आरोपों का खंडन करने के लिए मुझे इतना नीचे उतरना चाहिए। न्यायपालिका में 20 सालों की नि:स्वार्थ सेवा के बाद उनके पास 6.8 लाख रुपये बैंक बैलेंस हैं और पीएफ में 40 लाख रुपये हैं। जब उन्हें मेरे खिलाफ कुछ नहीं मिला तो आरोप लगाने के लिए इस महिला को खड़ा किया गया।

समर्थन में आया बार काउंसिल

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के चेयरपर्सन मनन मिश्रा ने कहा कि ये झूठे और मनगढ़ंत आरोप हैं और हम इस तरह के कृत्यों की निंदा करते हैं। इस तरह के आरोपों और कृत्यों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। 

संपूर्ण बार सीजेआई के साथ एकजुटता से खड़ा है। आज (रविवार) को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है और उसमें इस सिलसिले में प्रस्ताव पारित किया जाएगा।

बिना भय के पूरे करुंगा कर्तव्य

मैंने आज अदालत में बैठने का असामान्य और असाधारण कदम उठाया है, क्योंकि चीजें बहुत आगे बढ़ चुकी हैं। न्यायपालिका को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता। आरोपों के पीछे कोई बड़ी ताकत होगी, वे सीजेआई के कार्यालय को निष्क्रिय करना चाहते हैं। मुझे अगले सप्ताह महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करना है और यह मुझे उन मामलों की सुनवाई से रोकने की कोशिश है। मैं इस कुर्सी पर बैठूंगा और बिना किसी भय के न्यायपालिका से जुड़े अपने कर्तव्य पूरे करता रहूंगा - रंजन गोगोई, प्रधान न्यायाधीश

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